चक्रवूह में फस्सा मूल हरयाणवी
बुर्रे दिन आये हरयाणे के, चारों ओर बदहाली |
क्यों आया छोटू राम की धरती प, अहमद शाह अब्दाली |
जिनको दी शरण इसने, दाह घाटी वो पाये,
झाशें में inke पड़ के हमने फ़िज़ूल में लाल गवाए |
बोदे काले दिन भी काटे, पर अच्छे काम ras ना आए |
अपना सारा sahara दे क लोगों, क्यों हिजड़े मर्द बनाये |
कोण आज तुम्हे समजायें, ना कोई दीन बंधू सा पाली |
बुर्रे दिन आये हरयाणे के.......
परायी सौड़ में मिले उलहना, वा हे क्यों सुहागी |
अपनी विरासत कर बुर्द खुर्द,, हिन्दू की तुमको भा गी |
थारी अक्ल पर पत्थर पड़ गए, बेहोशी सी छा गी |
गौर करो उस is तस्वीर पर pe, jo थारे अल्हड पण ते आगी |
तुम कहो थारे thari सत्ता थया aa गी, इब देखो उसकी छाली |
बुर्रे दिन आये हरयाणे के.......
शिव ओर हनुमान भगवान तुम्हारे, ना देवी बकरे खानी |
शीतला का आशीर्वाद सदा, साथ pav खड्डी माँ मसानी |
दलीयaa ओर jon बाजरे का chadde cahaddawa छेड़े छड़वा, ना प्रथा तेल चढ़ानी |
काला बाना क्यों ले लिया, जिसकी सोच ना kade तुमने जानी |
रीत विरासत थारी घनी पुरानी, क्यों मिटटी बीच मिळाली |
बुर्रे दिन आये हरयाणे के.......
हमलावर गद्दार हुए पहलम भी, आजभी फिरें भतेरे |
देश प्रेम का बखान करें, सोच jor tor काट-पीट की ले रहे |
खुरपा खुरपी जिनके हुए हाथ में, ओछे घालें घेरे |
आज ताँहे सबने सरन देनिया, बता दिए जनम जात लुटेरे |
पाटेंगे in ne जब बेरे, जब यो भरे हुँकार कहर आली |
बुर्रे दिन आये हरयाणे के.......
जो हुआ, बुरा हुवा नूह nyun कर्नल मेहर सिंह समझाव |
शांना मानस बखत बिचारे, अक्कल ते काम चलावे |
जेली गंडासी ने करो पाछे ने, नहीं काम आज आवे |
उसका tum बरिस्का brashskar रल मिल करो, जो थाली में छेद बनावे |
हरयाणे ने आज वो लाल बचावे, जिसकी आड़े गड रही से ओरनाली |
बुर्रे दिन आये हरयाणे के, चारों ओर बदहाली |
क्यों आया छोटू राम की धरती पैर pe, अहमद शाह अब्दाली |
सshहीद कवि जाट मेहर सिंह की विरासत से परेरित उनका नाम राशि कर्नल मेहर सिंह, शौर्य चक्र विजेता |
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